
In this post you will learn about Lungs working and related diseases.
हमारे शरीर में अनेक प्रकार के ऑर्गन होते हैं और उन ऑर्गन के बारे में हम जानेंगे कि उनकी संरचना, कार्य, उनसे संबंधित कौन-कौन से रोग होते हैं ? यहां पर हम सबसे पहले फेफड़े (Lungs) के बारे में बात करेंगे।
परिचय
हमारे शरीर में अनेक प्रकार के अंग होते हैं। प्रत्येक अंग की अपनी संरचना और कार्य होते हैं। यहां हम फेफड़ों (Lungs) के बारे में विस्तार से जानेंगे, जो श्वसन प्रणाली का मुख्य भाग हैं और शरीर को ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
फेफड़ों की संरचना
फेफड़ों की स्थिति
मानव शरीर में दो फेफड़े होते हैं, जो छाती की हड्डी और रीढ़ की हड्डी के बीच स्थित होते हैं। हृदय इन दोनों फेफड़ों के बीच थोड़ा बाईं ओर स्थित होता है।
प्लूरा (Pleura)
प्रत्येक फेफड़ा दोहरी झिल्ली से घिरा होता है, जिसे प्लूरा कहा जाता है। इन झिल्लियों के बीच तरल पदार्थ होता है, जो फेफड़ों को झटकों और रगड़ से बचाता है।
वायु कोष (Alveoli)
फेफड़ों के अंदर असंख्य वायु कोष होते हैं, जिन्हें एल्वियोली कहा जाता है। ये अंगूर के गुच्छे की तरह दिखाई देते हैं और इनके चारों ओर सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं होती हैं, जो गैसों के आदान-प्रदान में सहायता करती हैं।
दायां और बायां फेफड़ा
दायां फेफड़ा बाएं फेफड़े से बड़ा और चौड़ा होता है। बायां फेफड़ा लगभग 430 ग्राम तथा दायां फेफड़ा लगभग 520 ग्राम का होता है।
रंग और लचीलापन
फेफड़ों का रंग उम्र के अनुसार बदलता है। बचपन में यह हल्का लाल, युवावस्था में मटमैला और वृद्धावस्था में गहरा हो जाता है। फेफड़े लचीले होते हैं और सांस लेने पर फैलते तथा छोड़ने पर सिकुड़ते हैं।
फेफड़ों का कार्य
गैसों का आदान-प्रदान
फेफड़ों का मुख्य कार्य शरीर में गैसों का आदान-प्रदान करना है। जब हम सांस लेते हैं, तो ऑक्सीजन फेफड़ों में पहुंचती है और एल्वियोली के माध्यम से रक्त में मिल जाती है।
रक्त का शुद्धिकरण
हृदय से आने वाला अशुद्ध रक्त, जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड होती है, फेफड़ों में शुद्ध होता है। फेफड़े कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालते हैं और ऑक्सीजन को रक्त में मिलाते हैं।
पूरे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति
शुद्ध रक्त हृदय के माध्यम से पूरे शरीर में पहुंचता है, जिससे सभी अंगों को आवश्यक ऑक्सीजन मिलती है।
फेफड़ों से संबंधित रोग
सामान्य रोग
- अस्थमा (Asthma)
- खांसी (Chronic Cough)
- एलर्जी (Allergy)
- क्षय रोग (टीबी)
- निमोनिया (Pneumonia)
- प्लूरिसी (Pleurisy)
- श्वसन संबंधी रोग (Respiratory Diseases)
- अन्य संबंधित समस्याएं
- त्वचा संबंधी समस्याएं
- अधिक पसीना आना (Night Sweating)
- नाक से संबंधित रोग
एक्यूप्रेशर से फेफड़ों की देखभाल
हाथ और पैरों में फेफड़ों से संबंधित एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर दबाव देने से श्वसन क्षमता में सुधार होता है। नियमित अभ्यास से अस्थमा, एलर्जी और सांस से संबंधित समस्याओं में लाभ मिल सकता है।


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निष्कर्ष
फेफड़े हमारे शरीर के अत्यंत महत्वपूर्ण अंग हैं। सही जीवनशैली और समय पर देखभाल से हम फेफड़ों से संबंधित कई गंभीर रोगों से बच सकते हैं।

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